गेहूं तेजी मंदी रिपोर्ट 2026 : दिल्ली गेहूं फिर ₹2700 के पार, OMSS में देरी और दक्षिण भारत की मांग ने बदली बाजार की चाल*
दिल्ली गेहूं फिर ₹2700 के पार, OMSS में देरी और दक्षिण भारत की मांग ने बदली बाजार की चाल*
गेहूं बाजार में इस सप्ताह जो कुछ हुआ, वह लगभग वैसा ही रहा जैसा पिछले कई सप्ताह से लगातार कहता आ रहा था। हमारी रिपोर्टों में बार-बार यह बात रखी गई थी कि जब तक सरकार OMSS के जरिए बाजार में सीधे हस्तक्षेप नहीं करती, तब तक गेहूं में बड़ी गिरावट की संभावना कम है और बाजार धीरे-धीरे मजबूत होता रहेगा। इस सप्ताह देश के अधिकांश बाजारों में यही तस्वीर देखने को मिली। कई प्रमुख केंद्रों पर गेहूं के भाव ₹10 से ₹50 प्रति क्विंटल तक मजबूत हुए और दिल्ली लॉरेंस रोड बाजार एक बार फिर ₹2700 के स्तर तक पहुंच गया। यह साफ संकेत है कि बाजार में बिकवालों से ज्यादा भरोसा खरीददारों के पास है।
इस सप्ताह की सबसे बड़ी बात यह रही कि दिल्ली लाइन में बहुत बड़ी तेजी नहीं आई, लेकिन पूर्वी भारत, दक्षिण भारत और गुजरात बेल्ट ने बाजार को मजबूती का आधार दिया। दाहोद बाजार एक सप्ताह में ₹2470 से बढ़कर ₹2540 तक पहुंच गया, यानी करीब ₹70 प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज हुई। हरदोई बाजार ₹2445 से बढ़कर ₹2460 पहुंचा जबकि उत्तर प्रदेश की अधिकांश मंडियों में ₹10-20 प्रति क्विंटल की मजबूती रही। केवल गोरखपुर मंडल में लगभग ₹10 की कमजोरी देखने को मिली। दिल्ली लाइन पूरे सप्ताह ₹2710-2725 के आसपास घूमती रही, जो यह दर्शाता है कि ऊपरी स्तरों पर बिकवाली आने के बावजूद बाजार अभी भी मजबूत हाथों में बना हुआ है।
दक्षिण भारत इस समय पूरे देश के गेहूं बाजार का सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरा है। बेंगलुरु, हैदराबाद और दक्षिण की फ्लोर मिलों ने पिछले चार-पांच दिनों में खरीद भाव ₹50-80 प्रति क्विंटल तक बढ़ाए हैं। हैदराबाद बाजार में एमपी लाइन गेहूं ₹2820 और महाराष्ट्र लाइन ₹2860 तक पहुंच चुकी है। अधिकांश मिलें सीमित स्टॉक पर काम कर रही हैं और गुणवत्ता के कारण सरकारी गेहूं के बजाय खुले बाजार का माल खरीदना पसंद कर रही हैं। यही कारण है कि दक्षिण भारत में मिलों की लेवाली लगातार बनी हुई है और बाजार को नीचे नहीं आने दे रही।
पूर्वी भारत में भी मांग की तस्वीर सकारात्मक बनी हुई है। असम और ओडिशा बेल्ट से लगातार मांग निकल रही है। कोलकाता में गेहूं नेट ₹2690, आटा ₹2850, मैदा ₹2810 और सूजी ₹3180 पर स्थिर रहे। शाहजहांपुर में गोल्डन गेहूं ₹2471 तथा सफेद गेहूं ₹2435-2440 पर बिका। हरदोई में 12 हजार कट्टे की आवक के बावजूद भाव मजबूत बने रहे। इन आंकड़ों से साफ है कि माल उपलब्ध होने के बावजूद बिकवाली का दबाव नहीं है और किसान भी जल्दबाजी में स्टॉक खाली करने के मूड में नहीं दिख रहे।
OMSS को लेकर बाजार में चर्चाएं लगातार गर्म हैं। व्यापारिक हलकों में यह चर्चा बनी हुई है कि सरकार FAQ गेहूं का आधार मूल्य लगभग ₹2600 प्रति क्विंटल रख सकती है। यदि ऐसा होता है तो फ्रेट जोड़ने के बाद दक्षिण और पूर्व भारत के उपभोक्ताओं को सरकारी गेहूं मौजूदा खुले बाजार से ₹50-70 महंगा पड़ सकता है। इसी संभावना को देखते हुए बड़ी फ्लोर मिलें और बल्क खरीदार खुले बाजार से लगातार खरीद कर रहे हैं। राजस्थान में MSP खरीद प्रक्रिया 19 जून तक चल रही थी और आमतौर पर सरकार खरीद प्रक्रिया पूरी होने से पहले खुले बाजार में बिक्री नहीं करती। यही वजह है कि OMSS नोटिफिकेशन में देरी देखने को मिल रही है। बाजार की धारणा यह है कि जब तक सरकार स्पष्ट नीति नहीं लाती, तब तक खरीदार जोखिम लेने के बजाय माल सुरक्षित करना पसंद करेंगे।
देश के अधिकांश हिस्सों में अभी मानसून की प्रगति कमजोर है। स्कूल और कॉलेज खुलने से आटा, मैदा और सूजी की खपत धीरे-धीरे बढ़ रही है। यदि आगामी दिनों में बारिश सामान्य होती है तो खपत और बढ़ सकती है, जिससे मिलिंग गेहूं की मांग को अतिरिक्त समर्थन मिलेगा। आटा और मैदा उद्योग के लिए एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि ईरान-इजरायल तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है। यदि होर्मुज मार्ग पर स्थिति सामान्य होती है और गैस आपूर्ति सुचारू रहती है तो आटा एवं मैदा उद्योग की मांग में और सुधार देखने को मिल सकता है।
सरकारी आंकड़े भी दिलचस्प स्थिति दिखा रहे हैं। इस वर्ष MSP पर गेहूं खरीद लगभग 357 लाख टन तक पहुंच चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 19 प्रतिशत अधिक है। खरीद लक्ष्य भी पार हो चुका है। केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 534 लाख टन से अधिक है, जो कई वर्षों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। बड़ी मात्रा में खरीदा गया गेहूं URS और लस्टर लॉस श्रेणी का है। यही कारण है कि बाजार में यह धारणा बनी हुई है कि सरकार को आगे चलकर OMSS के माध्यम से कुछ स्टॉक निकालना पड़ सकता है। लेकिन फिलहाल केवल चर्चा है, निर्णय नहीं।
आटा, मैदा और सूजी बाजार भी अब धीरे-धीरे मजबूती दिखाने लगे हैं। राजस्थान, दक्षिण भारत और कई पूर्वी राज्यों में आटा और मैदा ₹30-50 प्रति क्विंटल तक मजबूत हुए हैं। स्कूल-कॉलेज खुलने से खपत बढ़ रही है। विवाह सीजन की मांग भी धीरे-धीरे बाजार में लौट रही है। गोरखपुर मंडल में आटा, मैदा और सूजी मजबूत हुए जबकि केवल चोकर में कमजोरी रही। यह संकेत देता है कि फ्लोर इंडस्ट्री की मांग अब पहले से बेहतर हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो वहां अभी कोई बहुत बड़ी तेजी नहीं है, लेकिन कमजोरी भी नहीं है। पिछले सप्ताह CBOT जुलाई गेहूं लगभग 605.6 सेंट प्रति बुशल और सितंबर गेहूं 614 सेंट प्रति बुशल पर बंद हुआ। अमेरिकी बाजार में छुट्टियों से पहले मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन रूस के 12.5 प्रतिशत प्रोटीन गेहूं के FOB भाव पूरे सप्ताह $231-235 प्रति टन के बीच स्थिर बने रहे और सप्ताह के अंत में लगभग $234.40 प्रति टन पर रहे। दक्षिण कोरिया की NOFI और FLC द्वारा 55-65 हजार टन गेहूं की खरीद यह दिखाती है कि वैश्विक मांग अभी भी मौजूद है। अर्जेंटीना में अत्यधिक वर्षा के कारण गेहूं बुवाई प्रभावित होने की खबरें भी आगे चलकर वैश्विक बाजार को समर्थन दे सकती हैं।
मौसम भी इस समय बाजार का महत्वपूर्ण फैक्टर बना हुआ है। देश के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कमजोर रही है। यदि खरीफ सीजन में बारिश की स्थिति अपेक्षा से कमजोर रहती है तो मक्का और अन्य फीड फसलों पर असर पड़ सकता है, जिससे पशु आहार उद्योग की मांग गेहूं की ओर शिफ्ट हो सकती है। यही कारण है कि कई बड़े व्यापारी अभी भी गेहूं को लेकर सकारात्मक नजरिया बनाए हुए हैं।
कुल मिलाकर बाजार की तस्वीर यही कहती है कि गेहूं फिलहाल धीरे-धीरे पक रहा है। पहले भी "स्लो वाली तेजी" की बात कह चुका है और आज भी हमारा नजरिया वही है। बाजार में मजबूती बनी हुई है, लेकिन एकाएक ₹100-200 की बड़ी छलांग की उम्मीद करना सही नहीं होगा। सरकार के पास 534 लाख टन से अधिक गेहूं का स्टॉक है, MSP खरीद रिकॉर्ड स्तर पर हुई है और OMSS समेत बाजार में हस्तक्षेप के कई विकल्प सरकार के पास खुले हुए हैं। इसलिए जैसे-जैसे बाजार ऊपर जाएगा, सरकारी दखल की चर्चा भी बढ़ेगी।
फिलहाल नीचे ₹2660 की दिल्ली लाइन मजबूत सपोर्ट मानी जा सकती है। यदि बाजार ₹2730 के ऊपर टिकता है तो ₹2760 का स्तर देखने को मिल सकता है और उसके बाद ₹2800 अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। लेकिन यह तेजी सीढ़ी-दर-सीढ़ी चलने वाली दिखाई दे रही है, लिफ्ट वाली नहीं। इसलिए घबराकर माल निकालने की जरूरत नहीं है, लेकिन आंख बंद करके बड़ी तेजी का सपना देखने की भी जरूरत नहीं है। जब तक OMSS पर तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक गेहूं में स्थिर से मजबूत और धीमी रफ्तार वाली तेजी का रुख बना रहने की संभावना ज्यादा दिखाई देती है।

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